vaknaghat.jpgकुल 12 कंपनियाें के आवेदन, मैसर्ज रैमके होंगे कंसलटेंट
106 एक्कड़ भूभाग में बनेगा वाकनाघाट का आईटी पार्क
शिमला। सोलन के वाकनाघाट में प्रस्तावित हिमाचल के पहले आईटी पार्क के लिए कई नामी कंपनियाें ने इच्छा जताई है। इनमें डीएलएफ, ओमैक्स और स्किल जैसी बड़े औद्योगिक समूह शामिल हैं। शुरुआती रिस्पांस से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग उत्साहित है और बात आगे बढ़ाने के लिए विभाग ने मैसर्ज रैमके लिमिटेड को कंसलटेंट नियुक्त किया है। वाकनाघाट में करीब 106 एक्कड़ भूमि पर यह पार्क स्थापित होना है और यह जमीन विभाग को मिल चुकी है। पार्क के लिए विभाग को केवल बिजली, पानी और सड़क देनी है। अधोसरंचना विकास का सारा काम निजी कंपनी करेगी। निदेशक सूचना प्रौद्योगिकी मनीष गर्ग ने इसकी पुष्टि की है।
हिमाचल में कुल पांच आईटी पार्क स्थापित होने हैं। इनमें वाकनाघाट के अलावा नालागढ़, राजा का बाग (नूरपूर), नगरी (पालमपुर) और डलहौजी प्रस्तावित हैं। शिमला से 23 किलोमीटर पर स्थित वाकनाघाट से शुरुआत हो रही है। शेष जगह काम ढीला है। वाकनाघाट में पार्क का ढांचा खड़ा करने के लिए आईटी विभाग ने विज्ञापन के जरिये एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी इच्छा मांगी थी। इसमें अच्छा रिस्पांस मिला है और करीब 12 नामी कंपनियों ने आवेदन किये हैं। इनमें डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड गुड़गांव, पार्श्वनाथ डवेल्पर्स नई दिल्ली, आईवीआरसीएल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद, उप्पल हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली, माहेश्वरी मेगावेंचर्स लिमिटेड हैदराबाद, मैसर्ज स्किल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड मुुंबई, कंपैक्ट इडिंया लिमिटेड, नैगोलाइज इडिंया लिमिटेड नई दिल्ली, जूम डवेल्पर्स मुंबई और ओमैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर सिटी डवेल्पर्स लिमिटेड नई दिल्ली के नाम शामिल हैं।
वाकनाघाट में मौजा मझोल और डुमैहर में पार्क के लिए 106 एक्कड़ भूमि चिन्हित हुई है। इसे आईटी विभाग के नाम भी कर दिया गया है। भूमि चूकिं राष्ट्रीय राजमार्ग 22 (शिमला-कालका) के साथ है, इसलिए यहां अब बिजली और पानी विभाग को देना है। इस बीच प्रक्रिया पूरी करने के लिए सलाहकार नियुक्त किया गया है। इसके बाद तय शर्ताें के आधार पर किसी एक कंपनी को निर्माण का जिम्मा दिया जाएगा। करीब 300 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश के साथ कंपनी को यहां साफ्टवेयर हब का ढांचा तैयार करना है। इससे करीब 10 हजार लोगोें को रोजगार मिल पाएगा। आईटी विभाग के निदेशक मनीष गर्ग का कहना है कि पार्क के लिए राज्य बिजली बोर्ड और आईपीएच विभाग को प्रस्ताव भेजे गए हैं। कंसलटेंट को तीन महीने का समय दिया गया है और पार्क के लिए कुछ किलोमीटर सड़क को नाबार्ड में भी डाला गया है।
 
 
 
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