विद्यापति
शब्दावली-
गजेन्द्र
ठाकुर http://www.videha.co.in/
मृगमद =
कस्तूरी
वासर = दिन
रैन = राति
लिधुर = रक्त
पुर नटी = नागर
नटी
अवतरु = अवतरित
होऊ
कनक भूधर =
सुमेरु पर्वत
चन्द्रिका चय =
चन्द्रिकाक
समूह
निपातिनि = नाश
करएबाली
भक्त
भयापनोदन =
भक्तक भए दूर
करएबाली
दुरित हारिणि =
विपत्तिक भार
हरण करएबाली
दुर्गमारि =
भयङ्कर शत्रु
विमर्द =
विनष्ट
गाहिनी = विचरण
करएबाली
सायक = वाण
सुकर = सुन्दर
पिसित = काँच
मौस
पारणा = तृप्ति
रभसे = आनन्दित
करएबाली
कृशानु = अग्नि
चुम्ब्यमान =
चुम्बन करैत
अछि
परिच्युति =
नष्ट करैत अछि
आड़ = लाल
भागि = वक्र
गोए = नुका कए
सुधाए = अमृत
कुशेशय =
शतपत्र कमल
अधबोली =
असंपूर्ण
वाक्य
खनेखन =
क्षणे-क्षण
उचिक = चकित
भावेँ
आरति = पीड़ा
अनानि =
अज्ञानी
दन्द = झगड़ा
हेरैत = देखैत
मनसिज = कामदेव
गौरव = गुरुता
खीन = क्षीण
अओके = दोसराक
लहु = लघु
परगास = प्रकाश
सुरत विहार =
काम-क्रीड़ा
नवरङ्ग =
संतोला
सन्तापलि =
कष्ट देनाइ
बाङ्क = वक्र
पसाह = प्रसाधन
भीति = भयसँ
तिष = तीक्ष्ण
सिझल = सिद्ध
भेल
कोरि = बैर फल
ससन = वायु
धनि = नायिका
अम्बर = वस्त्र
रेह = रेखा
रङ्ग = आनन्द
अलका = लेप
मसि = सियाही
समरा = श्यामल
कचोरा = कटोरा
पहू = प्रभू
ससधर =
चन्द्रमा
मनोभव = कामदेव
सउदामिनी =
विद्युत
करिनि =
हस्तिनी
वयन = मुख
परिमल =
सुगन्धि
तनरुचि = शरीरक
गोराइ
अरुझायल = ओझरा
गेल
बिलास-कानन =
प्रमद-वन
निविल = घनगर
विहि = विधि
निञ = निज
विद्रुम दले =
मौसरीक पातमे
तिहुअन =
त्रिभुवन
मल्ल = पहलबान
हाटक = सोना
थम्भ = स्तम्भ
चिकुर-निकर =
केशपाश
विचरित = निअम
विरुद्ध
कवरी = केशपाश
चामरि = चँवर
गाय
सम्भसि =
सम्भाषण
न जासि = नहि
कएल जाऽ सकैछ
हुतासे = अग्नि
मो = हम
पीहलि = झाँपि
देलक
पीहित =
आच्छादित
कुहुकि =
मायाविनी
जुड़ायब = शीतल
करब
दहइ = जड़ायब
अवनत = नीचाँ
झुकल
बारल = निवारण
कएल
धाओल = दौगि
पड़ल
पसाहिम =
प्रसाधन
फुलग = रोमांच
बलाअ = वलय
पेखलि = देखल
बेढ़लि = लिपटल
थीर = स्थिर
पुछसि = पुछैत
छह
परस = स्पर्श
झुरए = व्याकुल
होइत अछि
अम्बुद = मेघ
धन्दा = संदेह
पुतलि = मूर्ति
इन्दु =
चन्द्रमा
महि = पृथ्वी
माझ = मध्य
खिन = क्षीण
मधु = पुष्प रस
उपेखि =
उपेक्षा करके
तरुअर = तरुवर
लेख = उल्लेख
परिहरि = छोड़कर
तोरिए = तोहर
पाछिलि =
पाछाँक
सनि = सदृश
अछलिहुँ = हम
छलहुँ
छाजत = शोभित
होएत
घोसिनी Ц
ग्वालिन
बथु = वस्तु
अरतल = अनुरक्त
रव = हल्ला
राहि = राधा
तापिनि =
ज्वाला
बयने = वाणी
धरनि = पृथ्वी
इथि = एकर
जोतिअ =
ज्योतिष
मुरछइ =
मूर्च्छा
आइति = अधीनता
महते = महावतसँ
नव = झुकैत अछि
एहो = ई
बटमारी =
रस्तामे
लुटनाइ
तुलाएल = बढ़ाओल
पसार = दोकान
पढ़ओंक = बोहनी
कुंगयाँ = गमार
(कुगामक)
आजि = लगा देब
आग = अङ्ग
गोए = नुका कए
इन्दुमुखी =
चन्द्रमुखी
तहु = ताहि
परसँ
परिहरिहह =
त्यागि देब
सारी = सारिका
सेचान = बाज
भामि-भामि =
भ्रमण कए
विरडा = विडाल
सुरते =
काम-क्रीड़ा
काहिअ अवधारि =
विश्वासपूर्\
357;क कहैत अछि
अन्तर नारी =
नारीक हृदय
रोखए = रोष
गंजए = गंजन
रंजए = प्रसन्न
साह = ओऽ
तरासे = भए
परुष = कठिन
सोस = शुष्क
चेतन = समर्थ
आथि = अछि
सारी = संग
दूषलि = दुःख
निमाल =
निर्माल्य
अंसुक = वस्त्र
वाँलभु = वल्लभ
नठल = नष्ट
परबोध = प्रबोध
पांगुर = पैरक
आंगुर
खिति = क्षिति
गीभ = ग्रीवा
अनुसए =
पश्चाताप
अनुरञ्जब = हम
सम्हारि सकब
विरमाने =
विराम-स्थल
एहो पय = इस पर
भी
जार = जलाकर
नखत = नक्षत्र
जुगुतिहि =
तर्कसँ
दोहाए = शपथ
रङ्ग = अनुराग
गरुअ = गुरुतर
पिसुन =
चुगलखोर
अरुझओहल =
ओझरायल
कञोनकँ = ककर
ऊपर
बारि = बचा कए
फुलधालि = फूल
धारण कए
कैतवे = छलसँ
अह = दिन
सपजत = सपरज
वथु = वस्तु
मोन्ति = मोती
धम्मिल =
केशपाश
धोएल = स्थापित
कएल
अङ्गिरि =
अंगीकार करब
पुनिमाँ =
पूर्णिमा
विभिनावए = अलग
कए सकैत अछि
आनन = मुख
तिमिशरि =
अंधकारक बैरी
चालक = प्रेरक
बम = उगलि रहल
भीभ = भआवोन
ओल = अन्त
कवल = ग्रास
सरूप = सत्य
निसिअर =
निशाचर
भुअङ्गम =
भुजङ्गम
उजोर = प्रकाश
झाप = डुबनाइ
मेंदुर = घन
मुदिर = मेघ
पाउस = पावस
निसा = निशा
निबिल = निविड़
निचोल = साड़ी
जामिक = प्रहरी
थैरेज =
स्थैर्य
थोइआ =
स्थापयित्वा
रञनि = रात्रि
सिरहि = शोभामे
असिलाइ = म्लान
भऽ गेलाइ
वालँभू =
स्वामी
मुसए = चोरि
करबाक लेल
छैलरि = छलियाक
अरथित =
याचनासँ
जड़ाइअ = ठण्डा
करू
विरत रस = जकर
स्वाद खतम भए
गेल
अचेतन = मूर्ख
कके = किएक
लाघव = अनादर
चिटि-गुड़े =
गुड़-चीटी
चुपड़लि = ब्याज
लओले लोथे =
बहन्ना करलो
उपरान्त
झाल = शुष्क
दरनि = दरारि
असेखि = अशेष
असहति =
असहनशील
तत्न = तन्त्र
भाझहि = मध्य
खीनी = क्षीण
झपावह = ढ़कैत
होए
परिरम्भि =
आलिङ्गन कए
फुजलि = खुजि
गेल
घोषसि = घोषणा
नखर = नख
पाँच पाँच गुन
दस गुन चौगुन
आठ दुगुन =
५*५*१०*४*८*२=१६०\
06;०
नखर = नख
छाँद = शोभा
हिया = हृदय
सदय = सहाय
कानुक =
कृष्णाक
निरसाओल = नीरस
कएल
सखिता =
साक्षित कएल
करवाल = तलवार
काँढ़ = निकलैत
अछि
कार = कारी
उजागरि = उज्जर
परिपन्तिहि =
प्रतिपक्षीक\
375;ँ
पयगन्ड = प्रौढ़
मधुमखिका =
मधुमक्षिका
उधारल = उद्धार
कएल
लागर = युक्त
पुरहर = विवाह
अवसर पर
मांगलिक कलश
मन्दाकिनी =
गङ्गाजल
केसु = किंशुक
विथुरलहु =
पसारि देल
भिति = दीवारि
पौञनाल =
कमलनाल
रात = लाल
ऐपन = अरिपन
हथोदक =
हस्तोदक
विधु = रस्ताक
ठकान
कनए-केआ =
चम्पा+केरा =
कनक+कदली
जैतुक = दहेज
डिठि = दृष्टि
तुलइलिहुँ =
शीघ्रतासँ
अनुबन्ध =
लगओनाइ
बोल छड़ =
मिथ्यावादी
मज्जि = मज्जन
कए
विथरओ = पसरि
जाय
पाड़रि = गुलाब =
पाटली
भोपति = हमरा
लेल
वाउलि = पगली
विधुन्तुद =
राहु
सेरी =
शरणार्थी
परभृतक = कोकिल
मतेँ = मन्त्र
कि रहसि बोरि =
की हास्यमे
बाजि रहल छी
बालहि तोरि =
अहाँक
प्रेमिकाकेँ
भर बादर =
मेघसँ भरल
झम्पि =
रहि-रहि जोरसँ
सघने खर =
तीव्र आऽ घन खर
डाहुकि = जोरसँ
थेघा = टेक कए
पख = पक्ष
पिआञे =
प्रियतम
पङ्का = लेप
तथुहु = ओहिमे
सेहो
दर = अपूर्व
अपद = बिना
कारणक
साती = तीव्र
वेदना
अवथाञे =
अवस्था
पसाइल = पसारल
रासे = रोष
बालभु = वल्लभ
आएत = अधीन
सपूने =
सम्पूर्ण
दिगन्तर = दूर
देशमे
अरुझाए = ओझरल
आधिन = अधीन
पललि = भेल
खेञोब = क्षमा
जल आजुरि =
जलाञ्जलि
सुसेरा =
सुन्दर आश्रय
गोए = नुका कए
सम्भ्रम =
अतर्कित
कराडहार =
कड़ुआर (तकड़ा
पकड़ि यमुना
पार करब)
लहु-लहु आखरे =
लघु-लघु अक्षर
तामरस = कमल
घनसार = कर्पूर
वेपथु = कम्प
मसृण = चिक्कन
सुदति = सुन्दर
दाँतबाली
सुति = श्रुति
जति = जतेक
घमिअ = फूँकल
जाइत अछि
आनइति = परवशता
दीब = शपथ
बड़इ = बहुत
देव देयासिनि =
झाड़-फूँक करए
बाली स्त्री
जटिला = कर्कशा
फुकरि = चिकरि
बहुरि =
पुत्रवधू
अङ्गा = चिन्ह
बेसर = नाकक
आभूषण
यन्त्रिया =
वीणा बजाबए
बला
यन्त्र = वीणा
फोटा = ठीका
समत = सम्मत
मौलि = मस्तकमे
मुसरेँ = मूसल
जेमाओव = भोजन
नवइते = उतरैत
पडिचाँ = पटिआ
माड़व = मड़बा
उगारल = घेरिकए
पकड़ब
आँजल = अंजन
डाढ़ल = दग्ध
कएल
गौह = खोह/ गुफा
बिलुविअ =
बाँटल जाए
मउल = मुकुट
डाढ़ति = जरि
जायत
श्मश्रु = दाढ़ी
(मुँह बला खए
बला नहि)
अधँगँ =
अर्धाङ्ग
गरुअ = अधिक
अभरन = पहिरबाक
वस्त्र
बड़ाव = प्रशंसा
तौँ = तथापि
निसाकर =
चन्द्रमा
सरिस = सदृश
तांतल =
उत्तप्त
सैकत = बालू
हब = होएत
निधुवन = संभोग
आरा = आन
कहाओसि = कहबैत
छथि
राजमराल =
राजहंस
सारङ्ग = हाथी
सारङ्गवदन =
गणेश