Friends, You may forward this mail to your friends for thinking on the issue ..Thanks. visit my blog: http://paraavaani.blogspot.com पूर्व-सूचना देकर दिल्ली में होता विस्फोट ।पहुंचाई जा रही देश को अमिट, अकल्पित चोट । किसी धर्म ने,किसी जाति ने, किया न कभी विरोध ।फ़िर, अफ़ज़ल के मृत्यु-दंड में है किसका अवरोध ।भारत के जिस राज चिह्न में लिखा -"सत्य अविजेय"। उसे पहन भी कई लोग क्यों भूल चुके हैं ध्येय ।अबल हो रही दंड-नीति का नही जिन्हें है ध्यान । काल-पुरूष का न्यायालय लेगा उनका संज्ञान ।जिसे आज वे समझ रहे हैं इस जीवन का लक्ष्य । नही, नही, वह लक्ष्य नही, वह तो है घृणित, अभक्ष्य ।तुच्छ-स्वार्थ के लिए आज रख रहे परस्पर द्वेष । नही ध्यान है कहा जा रहा अपना भारत देश ।शपथ लिया था देशभक्ति का, गए उसे क्यों भूल । क्या सोचा था, जीवन पथ में सदा मिलेंगे फूल ।कांटो पर चलकर ही करना था पूरा कर्तव्य । राष्ट्र-पुरूष के मस्तक पर टीका करना था भव्य ।करना था उन षड्यंत्रों को पल ही पल में नष्ट। बना रहीं हैं जो युवजन को अपराधी अतिभ्रष्ट ।किंतु आज हम सब क्यों है बस अपने में मशगूल । कांटो से भयभीत, सिर्फ़ क्यों खोज रहे हैं फूल ।आज समय है- बने संगठित अपना सारा देश । एक जाति हो, एक धर्म हो , एक हमारा वेश ।---अरविंद पाण्डेय --Posted By Aravind Pandey to परा वाणी at 10/15/2008 08:46:00 PM
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