मेरे दोस्त को सलाम,
पिछले हफ्ते की ३० तारिख को एक बुरे हादसे से गुजरा. दफ्तर से घर लौट रहा था, पीछे से एक गाडी ने मेरी गाडी को टक्कर दी शायद ऐसा गाडी की हालत से लगा, क्योंकि मुझे दफ्तर से निकलने का बाद उस पूरी रात का कुछ भी अब याद नहीं है. पर इतना तय है की कोई accident था और मेरे सर पर ही चोट लगी थी, चूँकि हेलमेट था सर बच गया, पर अचानक लगे सदमे में उस पूरी रात की हर याद जेहन से मिट गयी. पर ये भी एक आर्श्चय की
बात है की मैं ऐसी हालात में भी गाडी चला कर खुद घर आया. मेरे एक मित्र ने इस पूरी घटना को कुछ यूँ शब्द दिए. "तुझे उस शाम काल उठा कर ले गया था, पर खुदा ने तुझे बचाना था तो उसके फ़रिश्ते तुझे वहां से बचा कर घर पहुंचा आये." मुझे उसकी बात पर यकीन करना ही पड़ेगा, और देखिये आज मैं आपके रूबरू हूँ. जिस तरह क्रिकेट में बल्लेबाज़ को कभी कोई जीवन दान मिल जाता है इसी तरह आपको भी जीवन की इस पारी
में देने वाला कभी कभी जीवन दान दे देता है, ये जीवन दान एक संकेत होता है. जैसे फिर उस बल्लेबाज़ का फ़र्ज़ बन जाता है की वो अपनी पारी को बेहतर से बहतर मुकाम तक पहुंचाए, मुझे भी लग रहा है की ये जीवन दान मुझे इसीलिए मिला है की मैं अपने जीवन की कमियों को दुरुस्त कर एक बेहतर पारी पेश करूँ....आप सब की दुवाएं साथ रही तो मैं ऐसा अवश्य कर पाऊंगा.
पिछले सप्ताह इन सब के चलते आपके प्रिये ब्लॉग "आवाज़" पर भी कुछ हलचल कम सी रही. मित्र "तनहा" ने महफिले-ग़ज़ल की शम्मा जलाये रखी. दो महान ग़ज़ल गायिकाओं से मिलवाया उन्होंने आपको पिछले सप्ताह -
मल्लिका पुखराज की क्लासिक नज़्म "अभी तो जवान हूँ "
और फरीदा खान्नुम का दर्द भरा अंदाज़, 'वो इश्क जो हमसे रूठ गया"...
मुंशी प्रेमचंद की एक और कहानी वैराग्य सुन सकते हैं अनुराग शर्मा की आवाज़ में -
एल्बम "वादा" के सभी गीत सुनिए -
ओल्ड इस गोल्ड में पिछले हफ्ते चर्चा हुई, इन गीतों की -
आज रविवार सुबह की काफी पेश नहीं कर पाया..चलिए अगले हफ्ते ही सही.....आपके प्यार और दुवाओं के लिए एक बार फिर तहे दिल से आभार.
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सजीव सारथी
हिंद युग्म
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